उज्जैन स्थित भगवान शिव के स्वरूप अंगारेश्वर महादेव एवं मंगलनाथ धाम में वंशानुगत मुख्य पुजारी जी द्वारा पूर्ण वैदिक संकल्प, जप एवं अभिषेक के साथ समस्त दोषों का निवारण करवाएं।
विवरण भरें, पुजारी जी शीघ्र ही संपर्क करेंगे
स्कंध पुराण के अनुसार नवग्रहों में से मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन में पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर विद्यमान है, जिसे आज श्री मंगलनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।
जिन जातकों की जन्म कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, वे मांगलिक कहलाते हैं। मंगल की उग्रता और अंगारक स्वभाव की शांति हेतु शिवलिंग पर दही एवं भात (चावल) का विशेष अभिषेक किया जाता है।
मंगल ग्रह की शीतलता हेतु शास्त्रोक्त विधि
विवाह बाधा, व्यापार हानि व स्वास्थ्य लाभ
सभी पूजाएं वंशानुगत मुख्य पुजारी जी द्वारा पूर्ण विधि-विधान, पंचामृत अभिषेक एवं हवन सहित संपन्न कराई जाती हैं।
मंगल देव की उग्रता को शांत करने हेतु पके हुए चावल (भात) व दही से शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया जाता है।
कुंडली में जब मंगल के साथ राहु या केतु की युति अथवा दृष्टि संबंध बनता है, तब अंगारक योग शांति पूजा की जाती है।
राहु और केतु के मध्य समस्त ग्रहों के आने पर चांदी के नाग-नागिन जोड़े के साथ विशेष शांति विधान।
वैधव्य दोष या पुनर्विवाह दोष निवारण हेतु वर के लिए अर्क विवाह तथा कन्या के लिए कुम्भ विवाह विधान।
अकाल मृत्यु भय, रोग एवं शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए अवंतिका महाकाल क्षेत्र में संपुटित पाठ।
वंश वृद्धि में बाधा, संतान कष्ट अथवा पितरों की शांति हेतु सिद्धवट व मंगलनाथ क्षेत्र में तर्पण कर्म।
श्री मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन में संपन्न होने वाली प्रामाणिक पूजाओं और क्षिप्रा तट के सजीव दर्शन करें।
भगवान शिव स्वरूप मंगलनाथ जी पर दही-भात अभिषेक एवं पंचामृत पूजन का सजीव दर्शन।
उज्जैन में मां क्षिप्रा के पावन तट पर प्रतिदिन संपन्न होने वाली भव्य संध्या महाआरती।
योग्य पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण विधि से संपन्न नवग्रह शांति हवन।
स्कंद पुराण अनुसार मंगल ग्रह की मूल जन्मस्थली एवं गर्भगृह का अलौकिक दर्शन।
जन्म विवरण भेजकर पुजारी जी से दोष का सटीक विश्लेषण कराएं।
मंगलवार अथवा शुभ नक्षत्र अनुसार तिथि तय करें।
यजमान के नाम व गोत्र से प्रत्यक्ष या ऑनलाइन संकल्प द्वारा पूजा संपन्न।
पूजा उपरांत अभिमंत्रित मंगल यंत्र, रक्षा सूत्र एवं प्रसाद प्राप्त करें।
विगत कई पीढ़ियों से मंगलनाथ धाम में वैदिक कर्मकांड एवं दोष निवारण में समर्पित
वंशानुगत मुख्य पुजारी - श्री मंगलनाथ मंदिर
श्री मंगलनाथ मंदिर के वंशानुगत मुख्य पुजारी द्वारा कालसर्प दोष, मंगलादि दोष निवारण, पितृदोष, नारायण नागबली कर्म, नवग्रह शांति, मंगल भात पूजन, महामृत्युंजय जप, अभिषेक एवं दशांश हवन आदि समस्त कार्य पूर्ण शास्त्रोक्त एवं वैदिक पद्धति से संपन्न कराए जाते हैं।
मंगल भात पूजा के लिए मंगलवार, अंगारकी चतुर्थी, भौम प्रदोष तथा मंगल के नक्षत्र सबसे उत्तम माने जाते हैं।
प्रत्यक्ष उपस्थित होना सर्वोत्तम है। यदि आप उज्जैन नहीं आ सकते, तो लाइव वीडियो कॉल द्वारा ई-संकल्प कराकर पूजा संपन्न की जा सकती है और प्रसाद डाक द्वारा भेजा जाता है।
पूजा हेतु लगने वाली समस्त वैदिक सामग्री (दही, भात, पंचामृत, हवन सामग्री, लाल पुष्प आदि) मंदिर संस्थान द्वारा व्यवस्थित कर दी जाती है।