स्कन्द पुराण अनुसार मंगल ग्रह की जन्मस्थली - श्री मंगलनाथ तीर्थ, अवंतिका (उज्जैन)
MANGALNATH श्री मंगलनाथ मंदिर • उज्जैन धाम
प्रामाणिक वैदिक पूजा केंद्र

मंगल दोष निवारण एवं प्रामाणिक भात पूजा

उज्जैन स्थित भगवान शिव के स्वरूप अंगारेश्वर महादेव एवं मंगलनाथ धाम में वंशानुगत मुख्य पुजारी जी द्वारा पूर्ण वैदिक संकल्प, जप एवं अभिषेक के साथ समस्त दोषों का निवारण करवाएं।

100% वैदिक पद्धति
वंशानुगत मुख्य पुजारी
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पूजा मुहूर्त व संकल्प फॉर्म

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तीर्थ का आध्यात्मिक महात्म्य

स्कन्द पुराण अनुसार मंगल की जननी: अवंतिका नगरी

स्कंध पुराण के अनुसार नवग्रहों में से मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन में पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर विद्यमान है, जिसे आज श्री मंगलनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।

जिन जातकों की जन्म कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, वे मांगलिक कहलाते हैं। मंगल की उग्रता और अंगारक स्वभाव की शांति हेतु शिवलिंग पर दही एवं भात (चावल) का विशेष अभिषेक किया जाता है।

दही-भात पूजा

मंगल ग्रह की शीतलता हेतु शास्त्रोक्त विधि

दोष निवारण

विवाह बाधा, व्यापार हानि व स्वास्थ्य लाभ

किन जातकों को मंगल पूजा करानी चाहिए?

  • विवाह में अनावश्यक विलंब या सगाई टूटना
  • दांपत्य जीवन में कलह, तनाव या मनमुटाव
  • कुंडली में अंगारक योग (मंगल + राहु/केतु युति)
  • रक्त विकार, दुर्घटनाएं या अत्यधिक क्रोध
  • भूमि, संपत्ति या कर्ज संबंधी रुकावटें
वैदिक अनुष्ठान

मंगलनाथ धाम में होने वाली प्रमुख पूजाएं

सभी पूजाएं वंशानुगत मुख्य पुजारी जी द्वारा पूर्ण विधि-विधान, पंचामृत अभिषेक एवं हवन सहित संपन्न कराई जाती हैं।

भात पूजा (Bhaat Puja)

मंगल देव की उग्रता को शांत करने हेतु पके हुए चावल (भात) व दही से शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया जाता है।

  • अवधि: 2 से 3 घंटे
  • पंचामृत अभिषेक एवं हवन सम्मिलित

अंगारक दोष शांति

कुंडली में जब मंगल के साथ राहु या केतु की युति अथवा दृष्टि संबंध बनता है, तब अंगारक योग शांति पूजा की जाती है।

  • अवधि: 3 घंटे
  • राहु-मंगल बीज मंत्र जप व आहुति

कालसर्प दोष निवारण

राहु और केतु के मध्य समस्त ग्रहों के आने पर चांदी के नाग-नागिन जोड़े के साथ विशेष शांति विधान।

  • अवधि: 2.5 घंटे
  • नागबलि व रुद्र अभिषेक विधान

अर्क / कुम्भ विवाह

वैधव्य दोष या पुनर्विवाह दोष निवारण हेतु वर के लिए अर्क विवाह तथा कन्या के लिए कुम्भ विवाह विधान।

  • अवधि: 2 घंटे
  • पूर्ण विवाह विधि एवं विसर्जन

महामृत्युंजय जाप अनुष्ठान

अकाल मृत्यु भय, रोग एवं शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए अवंतिका महाकाल क्षेत्र में संपुटित पाठ।

  • अवधि: संकल्प अनुसार
  • ब्राह्मणों द्वारा दशांश हवन

पितृ दोष व नारायण नागबली

वंश वृद्धि में बाधा, संतान कष्ट अथवा पितरों की शांति हेतु सिद्धवट व मंगलनाथ क्षेत्र में तर्पण कर्म।

  • अवधि: 1 से 3 दिवस
  • पिंड दान व तर्पण विधान
अलौकिक वीडियो दर्शन

मंगलनाथ धाम - भात पूजा एवं अनुष्ठान वीडियो

श्री मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन में संपन्न होने वाली प्रामाणिक पूजाओं और क्षिप्रा तट के सजीव दर्शन करें।

मुख्य भात पूजा वीडियो #1

प्रामाणिक मंगल भात पूजा दर्शन

भगवान शिव स्वरूप मंगलनाथ जी पर दही-भात अभिषेक एवं पंचामृत पूजन का सजीव दर्शन।

लाइव वीडियो संकल्प उपलब्ध
दैनिक आरती वीडियो #2

पवित्र क्षिप्रा महाआरती दर्शन

उज्जैन में मां क्षिप्रा के पावन तट पर प्रतिदिन संपन्न होने वाली भव्य संध्या महाआरती।

लाइव वीडियो संकल्प उपलब्ध
वैदिक हवन वीडियो #3

अंगारक व कालसर्प शांति हवन

योग्य पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण विधि से संपन्न नवग्रह शांति हवन।

लाइव वीडियो संकल्प उपलब्ध
तीर्थ दर्शन वीडियो #4

मंदिर परिसर व गर्भगृह दर्शन

स्कंद पुराण अनुसार मंगल ग्रह की मूल जन्मस्थली एवं गर्भगृह का अलौकिक दर्शन।

लाइव वीडियो संकल्प उपलब्ध
सरल व पारदर्शी व्यवस्था

पूजा बुकिंग एवं अनुष्ठान प्रक्रिया

1

कुंडली व मुहूर्त परामर्श

जन्म विवरण भेजकर पुजारी जी से दोष का सटीक विश्लेषण कराएं।

2

पूजा तिथि निर्धारण

मंगलवार अथवा शुभ नक्षत्र अनुसार तिथि तय करें।

3

वैदिक संकल्प व अनुष्ठान

यजमान के नाम व गोत्र से प्रत्यक्ष या ऑनलाइन संकल्प द्वारा पूजा संपन्न।

4

प्रसाद एवं रक्षा सूत्र

पूजा उपरांत अभिमंत्रित मंगल यंत्र, रक्षा सूत्र एवं प्रसाद प्राप्त करें।

तीर्थ सेवा परंपरा

वंशानुगत मुख्य पुजारी परिचय

विगत कई पीढ़ियों से मंगलनाथ धाम में वैदिक कर्मकांड एवं दोष निवारण में समर्पित

वंशानुगत मुख्य पुजारी
पुजारी पृथ्वीराज भारती

पुजारी पृथ्वीराज भारती

वंशानुगत मुख्य पुजारी - श्री मंगलनाथ मंदिर

श्री मंगलनाथ मंदिर के वंशानुगत मुख्य पुजारी द्वारा कालसर्प दोष, मंगलादि दोष निवारण, पितृदोष, नारायण नागबली कर्म, नवग्रह शांति, मंगल भात पूजन, महामृत्युंजय जप, अभिषेक एवं दशांश हवन आदि समस्त कार्य पूर्ण शास्त्रोक्त एवं वैदिक पद्धति से संपन्न कराए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मंगल भात पूजा के लिए कौन सा दिन सबसे शुभ माना जाता है?

मंगल भात पूजा के लिए मंगलवार, अंगारकी चतुर्थी, भौम प्रदोष तथा मंगल के नक्षत्र सबसे उत्तम माने जाते हैं।

क्या पूजा में यजमान का स्वयं उपस्थित होना अनिवार्य है?

प्रत्यक्ष उपस्थित होना सर्वोत्तम है। यदि आप उज्जैन नहीं आ सकते, तो लाइव वीडियो कॉल द्वारा ई-संकल्प कराकर पूजा संपन्न की जा सकती है और प्रसाद डाक द्वारा भेजा जाता है।

पूजा की संपूर्ण सामग्री की व्यवस्था कैसे होती है?

पूजा हेतु लगने वाली समस्त वैदिक सामग्री (दही, भात, पंचामृत, हवन सामग्री, लाल पुष्प आदि) मंदिर संस्थान द्वारा व्यवस्थित कर दी जाती है।